दीपिका श्रीवस्तवा का मॉडल से एक्टर और अब एक्टर से प्रोड्यूसर तक का सफ़र

इंज़माम वहिदी, मुम्बई: मेरा नाम दीपिका श्रीवस्तवा है, पिछले 10 सालों से मैं मुम्बई में रह रही हूं। मैंने करियर की शुरुआत आगरा से की थी। वहां मैंने बतौर मॉडेल कई प्रोजेक्ट्स किए। मुम्बई में आने के बाद मेरा पहला सीरियल ‘राम ने मिलाई जोड़ी’ था जो कि ज़ी टीवी पर प्रसारित होता था। महाराणा प्रताप सीरियल सोनी चैनल पर प्रसारित किया जाता था। रवि सीज़न-2 बिग मैजिक, आईपीएस डायरी डीडी- 1, दर्द का रिश्ता डीडी-1, सावधान इंडिया, आहट, मोहि इत्यादि जैसे कई सीरियल में काम किया है।

दीपिका ने फ़िल्म क़यामत ही क़यामत, लव फिर कभी, ब्लैक होम, आसरा जैसी कई फिल्मों में भी किरदार निभाया है। साथ ही उन्होंने गार्नियर, वीडियोकॉन डी2एच जैसे कई एड्स भी किये हैं।

इनके बाद अब दीपिका बतौर प्रोड्यूसर मोदक मोशन पिक्चर्स में कई नए कलाकारों को अपना हुनर दिखाने का मौक़ा दे रही हैं। अपने प्रोडक्शन हाउस में वह नए-नए कलाकारों को मौक़ा दे रही हैं जिससे कि वह अपने करियर को संवार सकें। आपको बता दें कि आने वाले दिनों में दीपिका की कई वेब सीरीज़ मार्केट में धमाल मचाने आ रही है। आने वाले दिनों में दीपिका बतौर प्रोड्यूसर कई बड़े प्रॉजेक्ट्स पर काम करने वाली हैं।

दीपिका ने pahlikiran.com से बात करते हुए बताया कि अभी लॉकडाउन की वजह से काफ़ी नुक़सान का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने इस महामारी(कोरोना) से निपटने के लिए कोई ठोस क़दम नहीं उठाए हैं। इस वजह से आये दिन कई मार्मिक तस्वीरें देखने को मिल रही हैं । सरकार को चाहिए था कि वो जनता के राहत के लिए कोई ठोस क़दम उठाए ताकि देश को इस महामारी से जल्द से जल्द निजात मिल सके।
दीपिका का कहना है कि आए दिन फ़िल्म इंडस्ट्री के कलाकारों के द्वारा आत्महत्या की ख़बर आती रहती है जिसका मुख्य कारण है फ़िल्म इंडस्ट्री में सीरियल के निर्माताओं द्वारा कलाकारों का मानसिक व आर्थिक शोषण करना है। कोई भी कलाकार जब धारावाहिक में काम करता है तो उसे उसका भुगतान 90 दिन या फिर 120 दिन बाद मिलता है। चाहे उसने काम एक दिन का ही क्यों न किया हो, जब उसे भुगतान मिलता है तो उसमें से 30% कमीशन कलाकार को काम दिलाने वाला ले लेता है। अब बचे हुए पैसे से ही उससे अपना खर्च चलाना होता है।

अधिकतर कलाकार मुम्बई में पेइंग गेस्ट रहते हैं। खाने और रहने की जद्दोजहद में कलाकार कम पैसे में भी काम करने को राज़ी हो जाता है जिसका फ़ायदा कोर्डिनेटर और सीरियल के निर्माता उठाते हैं। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि कलाकारों के हित के लिए काम कर रही *सिंटा*व शिवसेना जैसी अन्य संस्थाएं सब कुछ जानकर भी आंखों पर पट्टी बांधे है। कलाकारों का जीवन किसी बंधुआ मज़दूर से कम नहीं है न जाने कब इन्हें इससे निजात मिलेगी। कलाकारों और सभी टेक्नीशियन का भुगतान शूटिंग के एक सप्ताह बाद कर देने का प्रावधान होना चाहिए जैसा कि पहले था।

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