एक और रेल हादसा कहां हो रही है चूक, पढ़िए पूरी ख़बर

train accident

इंज़माम वहीदी, नई दिल्ली: भारत में कुल 64,600 रूट के ट्रैक पर जरा-सी गफ़लत लाखों लोगों की जान को जोखिम में डाल सकती है। ऐसे में इन पटरियों पर यात्रियों और इनके आसपास से गुज़रने वालों की सुरक्षा पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यह हो नहीं पाता, और यही वजह है कि हर साल हादसों से दो-चार होना पड़ता है।

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उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास बुधवार सुबह सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। बताया जा रहा है कि इस ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए। ग़ौरतलब है कि अभी गत 20 नवंबर को ही कानपुर के पास ही पुखरायां में हुए एक बड़े रेल हादसे में इंदौर-पटना इंटरसिटी ट्रेन के 14 डिब्बे पटना से उतर गए थे, करीब 142 लोगों की मौत हो गई थी। तमाम हादसों के बाद भी भारतीय रेल अपने मुसाफिरों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है, यह कानपुर के पास फिर से रेल हादसे से साफ हो गया है।

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वैसे तो हमारे देश में हर साल कई छोटी-बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं होती रहती हैं और इनमें 86 फीसदी हादसे मानवीय भूलों की वजह से होते हैं। लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है कि अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा रेल सिस्टम होने के बावजूद भारतीय रेल अब भी ब्रिटिश काल के इंफ्रास्टक्चर पर चल रही है। जिस हिसाब से पटरियों पर रेलवे ट्रैफिक का दबाव बढ़ रहा है, उस हिसाब से इंफ्रास्टक्चर अपग्रेड नहीं हो पा रहा है। एक ओर तो सरकार बुलेट ट्रेन चलाने की योजना बना रही है, दूसरी ओर मूलभूत ढांचे में बदलाव नहीं होने की वजह से सामान्य ट्रेनों को हादसों से बचाने में सरकार नाकाम दिख रही है।

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