राजकुमारी रजनी सिंह के हौंसलों की उड़ान… देखिए तस्वीरें

आप ने हालात से हारने वाले लोगों के बारे बहुत सुना औऱ पढ़ा होगा, लेकिन आज हम आपको मिलाएंगे एक ऐसा शख्सियत से जिन्होंने ज़िंदगी में काफ़ी मुश्किलों को सामना किया है। और उसके बावजूद अपने लिए एक अलग मुकाम भी बनाई है। हालात से लड़कर आगे बढ़ने वाली उस महिला का नाम रजनी सिंह है। इनका जन्म 10 जनवरी को कोलकाता में हुआ था। रजनी सिंह ने स्कूलिंग बौरिया के फ़ोर्ट ग्लोस्टर विद्यालय से की, ग्रेडूएशन और बीएड श्री शिक्षायतन से की है।

रजनी सिंह का हमेशा से काम करना चाहती थी औऱ उनके माता-पिता का सपना भी था कि उनकी बेटी अपने लिए एक अलग मुक़ाम बनाए । रजनी बताती हैं कि जब वह बीएड कर रही थीं तो बहुत मुश्किलों के दौर से वह गुज़री हैं। बीएड के वक्त उन्हें टीबी हो गया था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और उसका सामना करते हुए आगे बढ़ी। बीएड में की डिग्री दिलवाने में रजनीसिंह के दोनों भाइयों का महत्वपुर्ण योगदान रहा है।

रजनी सिंह की शादी एक आर्मी आफ़िसर से हुई जिनकी पोस्टिंग लेह में थी। रजनी सिंह ने बतौर शिक्षक के तौर पर अखनूर (जम्मु) से पढ़ाने का सिससिला शुरू किया। उसके बाद उन्होंनें वेलिंग्टन (अमृतसर), पटियाला, नसीराबाद (राजस्थान) में सेवाएं दी। पूने में उन्हें बतौर प्रिंसिपल काम करने का मौक़ा मिला। तीन स्कूल में बतौर प्रिंसिपल काम कर चुकी हैं। रजनी ने 15 साल तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दी जिसमें 5 साल प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत थीं।

रजनी जॉब छोड़कर वापस कोलकाता चली गई थीं क्योंकि उनकी माता को कैंसर हो गया था। रजनी बताती हैं कि वह अपनी माता को बचा तो नहीं सकीं लेकिन आखरी समय में उनके साथ ज़रूर थी जिनकी उन्हें ख़ुशी है। अब वापस रजनी सिंह पूने चली गई जहां उन्होंने अपना बीजिनेस सेटअप किया है।  इनका डिज़ाइनर ब्लाउज़ का व्यवसाय है जो कि वह अलग-अलग जगह सप्लाई करवाती हैं। ग़ौरतलब है कि रजनी सिंह को मिसेज़ वेस्ट एशिया 2017 के ख़िताब से भी नवाज़ा जा चुका है।

यह तो रहा रजनी सिंह की पढ़ाई से लेकर खिताब लेने तक का सफ़र। अब इनसे हट कर रजनी सिंह समाज के लिए कुछ करना चाहती हैं। महिला सशक्तिकरण और अनातों के लिए भी कुछ करना चाहती हैं। रजनी सिंह लगातार अनातालय जाती हैं और वहां के बच्चों से रूबरू होती रहती हैं। वहीं रजनी सिंह का कहना है कि अगर उन्हें मॉडलिंग या फिर स्क्रीन पर काम करने का मौक़ा मिला तो उसमें भी वह अपना हाथ आज़माना चाहती हैं।

 

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