राजकुमार सिंह ने मटिहानी में सभी प्रत्याशियों को छोड़ दिया पीछे

बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी है। इस बार विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर होने वाली है। 144,मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवारों में जनता किसके साथ है आइये जानते हैं।
एक तरफ़ राजेन्द्र प्रसाद को महा गठबंधन, CPM से टिकट दिया गया है।वहीं दूसरी ओर नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह (एनडीए,जदयू) से टिकट मिला है। वहीं तीसरी ओर राजकुमार सिंह को लोजपा से टिकट मिला है। कई प्रत्याशी अपनी क़िस्मत आज़माने के लिए दांव खेल रहे हैं लेकिन टक्कर इन तीन प्रत्याशियों के बीच का ही माना जा रहा है।

वहीं सोशल मीडिया पर राजकुमार सिंह को लोग ज़्यादा पसन्द कर रहे हैं। फिर महा गठबंधन के उम्मीदवार राजेन्द्र प्रसाद और उसके बाद लगातार चार बार विधायक रहे बोगो सिंह का नाम आ रहा है।
ज़्यादातर लोगों से जब पूछा गया कि इस बार बोगो सिंह की लोकप्रियता कम क्यों हो रही है तो उनका कहना था कि जनता के पास विकल्प नहीं था इसलिए बोगो सिंह को वोट देते थे।सिर्फ़ कम्बल और राशन देना ही विकास नहीं है। डीलर ऑपरेशन जिस तरह से कर रहे थे उस तरह से और भी विकास कार्य अधर में पड़े थे पर विधायक जी ने सिर्फ़ कम्बल और राशन वितरण को विकास समझ लिया था । 15 साल बोगो सिंह को दिया लेकिन इस बार अब नए चेहरे को प्रतिनिधित्व देंगे।

आपको बता दें कि स्वर्गीय कामदेव सिंह के पुत्र हैं राजकुमार सिंह। इनके पिता का नाम राजनीति के दिग्गज नेताओं में शुमार किया था। शायद यही वजह रही कि जब राजकुमार ने बिजनेस से राजनीति में क़दम रखा तो जनता ने उसे अपना प्रतिनिधित्व सौंपने का मन बना लिया । राज कुमार जब अपने समर्थको के साथ रैली शक्ति प्रदर्शन में निकले तो उनके साथ मटिहानी की जनता का जन सैलाब था। इस भीड़ को देखते हुए कई राजनीतिक पंडितों का आकलन है की इस बार मटिहानी से बोगो सिंह की नैय्या पार होना मुश्किल ही नहीं नमुमकिन है।

वहीं जब हमने राजकुमार से बात की तो उन्होंने ने कहा कि मटिहानी को अहंकार व गुंडागर्दी से मुक्त , कम्बल नारियल रूपी रिश्वत से निकालना एक बेटा का कर्त्तव्य है । विकास मेरा मुख्य उद्देश्य है और मटिहानी सुंदर व खुशहाल हो यही हमारी सोच है । हमारी लड़ाई विनाशकारी लोगों से है ,हमारी लड़ाई विकास के नाम पर ठगने वाले लोगों से है। सुंदर ,खूबसूरत और खुशहाल मटिहानी बनाने के लिए मैं जनता के बीच उनका बेटा भाई बनकर आशीर्वाद लेने आया हूं।

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