इस्लामिक कॉल्लीग्राफ़ी कॉम्पेटिशन का आयोजन, पढ़िए पूरी ख़बर

नई दिल्ली। दुनिया भर के मुसलमानों में पाए जाने वाले आम ऐतिहासिक रीति रीवाजों को बताने वाला लफ्ज़ ही इस्लामी तहज़ीब है। इस्लामी कला, इस्लामी तालीम से जुड़े हुए लोग  इस बात को बख़ूबी जानते हैं। इस्लामी कला में बेजान चीज़ों की तस्वीर ही देखने को मिलती है। इस्लामी कला में जानदार की तस्वीरों से परहेज़ किया जाता है। क़ुदरती नज़ारा, प्रकृति की कोई झलक और अंगारियां ही इस्लामी कला की भूमिका है।

islamic calligraphyइसलिए कलाकार बेजान चीजों की तस्वीर बना कर अपना जौहर पेश करते हैं। इस क्रम में कलाकार कुरआन की आयतों को नकाशी में इस्तेमाल करने लगे। इस्लामी एक्सप्रेस अरबी सुलेख को बढ़ावा देने लगे। यह अरबी ज़ुबान की सुलेख धीरे धीरे दूसरे लफ़्जों में भी जगह बना ली। फ़ारसी, उर्दू, तुर्की, सिन्धी और कई ज़ुबानों में इस कला का जौहर देखा जा सकता है।

इस बाबत रेस्तू फ़ाउंडेशन और आशार शरीफ़ इंटरनेशनल एक इस्लामिक कॉल्लीग्राफ़ी कॉम्पेटिशन का आयोजन करवा रहा है। आपको बता दें कि ऑल इंडिया इस्लामिक कॉल्लीग्राफ़ी कॉम्पेटिशन 12 फरवरी रविवार को होने जा रहा है। यह आयोजन ग़ालिब ऑडिटोरियम में होने जा रहा है। इसमें भाग लेने के लिए कोई उम्र सीमा तय नहीं की गई है। ज्यादा जानकारी के लिए dqdelhi25@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं।

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