‘सरकार निजीकरण के साथ-साथ शिक्षा को भी बर्बाद करना चाहती है’

गढ़हारा: रेलवे इंटर कॉलेज बंद होने की सूचना से गढ़हारा सहित आसपास के लोग परेशान हैं। ज्ञात हो की गढ़हारा में एक भी उच्च वि्यालय नहीं है। गढ़हारा के बच्चों को बारो बरौनी पढाई करने के लिए जाना पड़ता है।समाजसेवी मोहम्मद सलाहउद्दीन ने कहा की केंद्र सरकार शिक्षा को खत्म करना चाहती है। ये सरकार निजीकरण के साथ साथ शिक्षा को भी बर्बाद करना चाहती है।
रेलवे इंटर कॉलेज के छात्र रहे सकिर हुसैन, रिजवान आलम, दानिश महबूब, मोफिजुर रहमान बाबू, नियाज़ फैसला वापस लेने तक चुप नहीं बैठने का फैसला लिया है। रेलवे इंटर कालेज गढ़हरा को रेल प्रशासन द्वारा समाप्त करने का निर्णय क्षेत्र हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। लाखों की आबादी पर एक मात्र हाई स्कूल लोगों के बीच उम्मीद की किरण है। रेल प्रशासन द्वारा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। इस फैसले को अविलम्ब वापस नहीं लेने पर युवा विकास मोर्चा ने सर्वदलीय निर्णायक आंदोलन करने की चेतावनी दी है। इसकी सारी जवाबदेही रेल प्रशासन की होगी।

विधायक प्रतिनिधि मोहम्मद सलाहउद्दीन ने बताया की रेलवे इन्टर कॉलेज बन्द होने की सूचना विधायक जी को दी गई है।विधायक जी ने बताया की किसी कीमत पर रेलवे इन्टर कॉलेज बन्द नहीं होने देंगे। गढ़हारा में एक भी उच्च विद्यालय नहीं है। गैर रेलवे के मात्र 15% बच्चों का एडमिशन होने लगा था। मात्र 20 टीचर हैं। मोहम्मद सलाहउद्दीन ने कहा कि अगर केन्द्र सरकार फैसला वापस नहीं लेगी तो आंदोलन किया जाएगा।

आपको बता दें कि रेलवे इंटर कॉलेज गढ़हरा को एक पत्र के माध्यम से जोनल कार्यालय हाजीपुर के द्वारा बंद करने का निर्देश दिया गया है । इस खबर को सुनते ही आस-पास के ग्रामीणों में मायूसी छाई हुई है। पूरे गढ़हरा, किउल , चकबल, ठकुरीचौक एवं अन्य गाँव जहां की कुल जनसंख्या लगभग 40000 के पार वहाँ एक भी हाईस्कूल न होना क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के लिये चिंतनीय विषय है। ग्रामीणों ने कहा कि इसके लिए अभी स्थानीय प्रतिनिधि, युवा, छात्र, छात्र नेता, अभिवावक, ग्रामीण सभी को आगे आना जरूरी है।
खासकर शिक्षा के क्षेत्र में बेगूसराय जिले के लिए बहुत ही निंदनीय खबर है।एक तरफ जहां हम अपने जिले में विश्वविद्यालय की मांग करते हैं,वहीं दूसरी ओर सरकार के द्वारा फरमान जारी कर गड़हरा स्थित रेलवे इंटर कॉलेज को बंद किया जा रहा है। तुगलकी फरमान से वहां के छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ होगी। सरकार इस गंभीर विषय पर पुनर्विचार करें।

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    ‘सरकार निजीकरण के साथ-साथ शिक्षा को भी बर्बाद करना चाहती है’ – Pahli Kiran

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