‘अम्मा की बोली’ 2012 में नहीं चली, 2021 में क्या रंग लाएगी ?

ओटीटी पर कई जबरदस्त फिल्मे देखने को मिलती ही रहती है।  वही आज के वक्त में ओटीटी पर कई पुराणी फिल्मो को देखा जा रहा है।  जिन फिल्मो को सिनेमाघरों का अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिलता है उन्हें ओटीटी पर रिलीज किया जाता है जिन्हे ओटीटी पर अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है। इसी बीच एक और फिल्म ने ओटीटी पर दस्तक देदी है।  2012 में रिलीज हुई कॉमेडी फिल्म अम्मा की बोली को अब ओटीटी प्लेटफार्म शेमारू पर रिलीज किया गया है ।

फिल्म अम्मा की बोली का नारायण चौहान ने निर्देशन किया है। दिल्ली में एनएसडी से निकलकर मुंबई पहुंचे और फिर देश विदेश का लंबा सफर तय करने के बाद आज इस मुकाम पर हैं कि उनकी फिल्म को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जबर्दस्त सराहना मिल रही है। इसमें कई बेहतरीन कलाकार हैं, इस फिल्म में संजय मिश्रा , हृषिता भट्ट, फर्रुख जफर मुख्य भूमिका में नज़र आ रहे हैं।

2012 में इस फिल्म को लोगो का अच्छा रिपॉन्स नहीं मिला।  वही ट्रेलर रिलीज के साथ ही इस टेलर पर 10 हजार से व्यूज हो गए थो। हैरानी की बात है कि इसकी मार्केटिंग पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया। अब देखना होगा की इस फिल्म को ओटीटी पर कैसा रिपॉन्स नहीं मिलता है।  संजय मिश्रा 2012 में एक बड़ा नाम नहीं थे जिसके चलते इस फिल्म को अच्छा रिपॉन्स नहीं मिल पाया था। हाल ही में कई पुरानी फिल्मो को ओटीटी पर रिलीज किया गया है जिन्हे काफी जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। अब देखना होगा इस फिल्म को दर्शको का कैसा रिस्पॉन्स मिलता है

समय निकाल कर जब इस फिल्म को देखेंगे और सोचेंगे की फिल्म की कुछ कमियां निकाली जाए तो यक़ीन मानें की आप कमिया ढूंढते रह जाएंगे पर कहीं कमीं वैसी कमी नहीं दिखेगी जिसे आप फ़िल्म की समीक्षा में लिख पाएं। सबसे बढ़िया फिल्म का विषय रहा जो घर घर की कहानी है।इस विषय को जिस हल्के फुल्के अंदाज में परोसा गया वो वाकई काबिले तारीफ है। इस फिल्म में एक नन्हे कलाकार प्रांजल का किरदार भी है जो पहली बार कैमरे के सामने था।इसके बावजूद उससे सधा अभिनय करवा लेना कमाल ही कहा जाएगा।सामाजिक सरोकार के ऐसे विषय अब कम ही फिल्मों में देखने को मिलते हैं जो हास्य और व्यंग्य के जरिए दिल की गहराई तक उतर जाएं। सामाजिक संदेश देती फिल्म अम्मा की बोली(नीलामी) एमेजॉन, एयरटेल सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

Latest articles

Related articles