Exvlusive Story: मीज़ान ने चमन बहार मूवी से पूरे देश में किया अपने चमन का नाम रौशन

इंज़माम वहीदी, मुम्बई: रायपुर के बैजनाथ पारा में रहने वाले मीज़ान ख़ान 19 जून को नेटफ़्लिक्स में रिलीज़ चमन बहार मूवी से पूरे देश भर में जाने जा रहे है इस मूवी के निर्देशक अपूर्व धर बड़गैयां भी छत्तीसगढ़ के ही निवासी हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ में फ़िल्म की शूटिंग के साथ ही यहां के कलाकारों को अपनी फ़िल्म में काम करने का मौक़ा भी दिया।

इस फ़िल्म के हीरो टीवीऐफ फ़ेम जितेंद्र कुमार शुभमंगल ज़्यादा सावधान,पंचायत,कोटा फ़ैक्टर जैसे फ़िल्म और वेब सिरीज़ में अभिनय कर चुके हैं। चमन बहार नेटफ़्लिक्स में ट्रेंडिंग वन में चल रही है.

बचपन से ही नाट्य रंग में रंगे हुए मीज़ान स्कूल के दिनों से हर गथिविधियो में आगे बढ़ के हिस्सा लेते रहे हैं। मीज़ान ने आदिश्वर जैन स्कूल से पांचवीं तक तथा काली बाड़ी स्कूल से बारहवीं और कलिंगा यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई की है।कमलादेवी संगीत महाविद्यालय से भी इन्होंने तबला में विद् तक पढ़ाई की है।

नाचा गम्मत, नुक्कड़ नाटकों के साथ-साथ बहुत सी शॉर्ट फ़िल्मों में अभिनय कर चुके मीज़ान बचपन से ही रंगमंच से जुड़े हुए हैं। इन्होंने देश के वरिष्ठ निर्देशकों के साथ जैसे-इपटा, निसार अली, सुभाष मिश्र, रचना मिश्र, राजकमल नायक, योग मिश्र, संजय उपाध्याय, संतोष राजपूत जैसे रंग निर्देशको के साथ बहुत से नाटकों में अभिनय किया है।

मीज़ान द्वारा अभिनय किए गए कुछ नाटकों के नाम- दो पात्र, चरणदास चोर, ब्रह्मराक्षस का शिष्य, टैच बेचैया, 1857 की क्रांति, मृत्युंजय, नर्क से बोल रहा हूं, नाटक की यात्रा, नामक का दरोग़ा, प्रेमचंद के फटे-जूते, गंगातट, शैतान का प्रमोशन, गांव के नांव ससुरार मोर नांव दमाद, बीमार, कविता की दुनिया, जड़ होते हुए, हरसिंगार और भी बहुत से नाटकों में काम किया है।

मीज़ान फ़िल्मों के अलावा सावधान इंडिया में भी नज़र आ चुके हैं, फ़िलहाल अभी करोना-काल के कारण इनका काम रुका हुआ है पर आगे फ़िल्मों में ये हमें मुख्य किरदार में देखने को मिलेंगे। मीज़ान से जुड़ी कुुछ ख़ास बातेें।

1.आपका नाम और आप कहां से ताल्लुक़ रखते हैं?

मेरा पूरा नाम “सूफ़ी मीज़ान अहमद ख़ान है” और मैं छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर से हूं.

2- आपने पढ़ाई कहां से की है?

मैंने कलिंगा यूनिवर्सिटी से बीकॉम और कमलदेवी संगीत महाविद्यालय से तबला में विद् अंतिम तक की शिक्षा प्राप्त की है और तक़रीबन 6-8 साल से रंगमंच से निरंतर जुड़ा हुआ हूं।

3- आपके परिवार में कौन-कौन रहता है?

मैं जॉइंट फ़ैमिली में रहता हूं।हमारा बहुत बड़ा परिवार है मेरे 3 चाचा है उनका पूरा परिवार और फुफि, हम सब एक साथ मिलजुल कर रहते है.

4- आपके परिवार ने आपका कितना साथ दिया?

एक तरह से मुझे इस फ़ील्ड में जोड़ने के लिए मेरे घर वालों का ही योगदान है, बचपन में अम्मी मुझे फ़ैंसी ड्रेस, नाटकों और हर गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए तैयार करातीं थीं। फ़ैंसी ड्रेस कॉम्पेटिशन में जीतने की वजह से मेरा लगाव रंगमंच की ओर आकर्षित होने लगा । शायद इसी कारण मैंने आज तक किसी और फ़ील्ड में जाने का नहीं सोचा। मेरे घर वालो ने भी इसमें मेरा पूरा साथ दिया.

5- आप थीएटर में कब से जुड़े हैं?

मैं तक़रीबन 6-8 साल से रंगमंच में सक्रिय हूं । मैंने छत्तीसगढ़ के बाहर दूसरे राज्यों में भी अपने नाटकों की प्रस्तुति की है और कुछ नाटकों में बतौर निर्देशक के रूप में भी काम किया है.

6- भविष्य में आगे क्या करने का इरादा है?

फ़िलहाल तो अभी करोना-काल के ख़त्म होने का इंतेज़ार है ताकि मेरी रुकी हुई फ़िल्में पूरी हो सके। आगे की फ़िल्मों की शूटिंग शुरू कर सकूं। पर जब तक ये महामारी ख़त्म नहीं हो जाती तब तक मैं घर में ही नाटकों की किताबें पढ़ रहा हूँ और संगीत का भी रियाज़ कर रहा हूँ.

7- युवा इसमें अपना भविष्य तलाश कर सकते हैं या नहीं?

बेशक़ इसमें कोई शक नहीं की जो आप करना चाहते हो, जो मंज़िल पाना चाहते हो वो ज़रूर मिल कर रहती है. बस लगन पूरी होनी चाहिए और अपने ही काम में ख़ुद को धोका नहीं देना चाहिए कि आज का काम कल कर लूँगा, कबीर दास जी ने बहुत पहले ही कहा था।

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब,
पल में प्रलय होएगी,बहुरि करेगा कब.

आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों पर मंज़िल मिलती ज़रूर है बस निराश हो कर पीछे ना मुड़ें ।मेरा मानना है कि जहां चाह है वहां राह है। मैं ये भी मानता हूं की शुरुआत में हमें भले छोटा ही काम क्यों ना मिले पर उसे ख़ुशी-ख़ुशी करना चाहिए। जब हमने इस फ़ील्ड को चुन ही लिया है तो क्या बड़ा और क्या छोटा ? जो हमें मिलता है वो हमारी क़िस्मत होती है।

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