मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है, देर से ही सही कामयाबी ज़रूर मिलती है- संजय

इंज़माम वहीदी, मुम्बई: आप में अगर जुनून और काम करने का जज़्बा है तो आप एक दिन कामयाब ज़रूर होते हैं। कुछ इसी तरह की कास्टिंग डायरेक्टर संजय शुक्ला की कहानी है। आइए जानते हैं उनकी कहानी उन्हीं की ज़ुबानी।

मेरा नाम संजय शुक्ला है, मैं प्रयागराज, उत्तर प्रदेश का रहने वाला हुं। 2012 में मुम्बई आया, उस वक़्त मुझे यहां के बारे में कुछ भी पता नहीं था। कई प्रोडक्शन हाउस में मैंने ऑडिशन दिए। सब मुझे नॉट फिट बोल कर मना कर देते थे। एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वाले लोगों के लिए मुम्बई में रहना और स्ट्रगल करना काफ़ी मुश्किल होता है। फिर भी मैं लगातार कोशिश करता रहा, ऑडिशन के लिए मेहनत करता रहा। 2013 के आख़िर में सोनी टीवी के सिरियल सहाराणा प्रताप में काम कने का मौक़ा मिला, जिससे मेरा हौसला थोड़ा बढ़ा। 2014 में फिर मुझे सम्राट अशोका सिरियल में काम मिला। छोटे-मोटे ही रोल मिलने लगे, जिससे धीरे-धीरे हौसला बढ़ता गया ।

मैंने मुम्बई में बहुत कुछ देखा हैं, मेहनत करते हुए कई तरह के हालातों से गुज़रा, और मैंने मेरी तरह बहुत से और ऐक्टर को देखा जो  मेरी तरह कितने लोग और है जो अपना घर छोड़ कर मुम्बई में अपने सपने को साकार करने आते हैं। जिस तरह से मुझे नॉट फ़िट कह कर मना कर दिया जाता है वैसे उन लोगों को भी मना कर दिया जाता होगा। इन्हीं सब बातों को देखते हुए मैंने यह फ़ैसला किया कि अब मुझे कास्टिंग डायरेक्टर बन्ना है। उन लोगों को काम दिलाना है जो मेरी तरह ही मुम्बई में सपने संजोने आते हैं लेकिन ज़्यादातर नाकामयाब हो जाते हैं। उनके पास टैलेंट तो होता है लेकिन कोई काम नहीं देना चाहता ऑडिशन तक नहीं लेना चाहता।

इस तरह सै मैंने कास्टिंग डायरेक्टर के सफ़र की शुरुआत की, 2016 में बतौर इंटर्न Hat’s Off प्रोडक्शन ज्वॉइन किया और अपनी मंज़िल को पाने के लिए सफ़र पर निकल पड़ा।मैंने कई शोज़ में कास्टिंग डायरेक्ट की जैसे कि मेरी दुर्गा (स्टार प्लस), कुंडली भाग्य(ज़ी टीवी), CID, क्राइ पैट्रोल (सोनी टीवी), सावधान इंडिया (स्टार भारत), अलाद्दीन (सब टीवी), विक्रम बेताल (&tv), TVC एड्स और अराजक रापची वेब सीरीज़ जैसे कई प्रोजेक्ट में काम किया।

अब मैं धीरे-धीरे फ़िल्मों की ओर बढ़ रहा हुं। मैं उन लोगों को मौक़ा देना चाहता हुं जो सच में टैलेंटेड हैं लेकिन पहचान की कमी की वजह से उन्हें काम नहीं मिस पा रहा है। हिंदी फ़ीचर फ़िल्म के कुछ प्रोजेक्ट्स हैं जो कि लॉकडॉउन की वजह से पेंडिंग है। जिस पर जल्द ही काम शुरु करुंगा। मैं ऐसे लोगों को मौक़ा दुंगा जो सच में क़ाबिल हैं लेकिन उन्हें अपने हुनर को दिखाने का मौक़ा नहीं मिल रहा है। मैं उन्हें गाइड कर उनके हुनर को दुनिया के सामने लाउंगा।

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