किसने ने दी BSTA अध्यक्ष केदारनाथ पांडेय को संघर्ष के पुरोधा की उपाधि

माध्यमिक शिक्षक संघ का इतिहास और केदार पांडे जी का योगदान दोनों में तादात्म्य है। एक के बगैर दूसरा अधूरा है। लंबे समय से संघर्ष के पुरोधा केदारनाथ पांडे ने विभिन्न काल खंडों में भिन्न भिन्न परिस्थितियों में शिक्षक समाज को सही दिशा देने का कार्य किया है चाहे वह माध्यमिक विद्यालयों का राजकीय करण हो, शिक्षकों का वेतनमान हो,स्थानांतरित शिक्षकों का अपने गृह जिला में पुनः स्थानांतरण हो या नियोजन की प्रक्रिया हो।

हमेशा इन्होंने शिक्षक समाज को एक दिशा देने का कार्य किया है पुराने शिक्षक शून्य से शिखर तक की यात्रा तय करने में सफल हुए तो उसके पीछे की प्रेरणा और प्रयास का नाम है केदार पांडे। सरकारें कितनी निर्मम होती हैं इसका शिक्षकों को भरपूर एहसास रहा है एक सरकार के मुखिया ने शिक्षक हड़ताल पर यहां तक कह दिया था कि भैंस है गरमाई है तो पानी में गई है ठंडी हो जाएगी तो अपने आप बाहर चली जाएगी। उन्हीं का एक वक्तव्य था जब आंदोलन पर शिक्षकों ने कहा कि लालू यादव मुर्दाबाद लालू जी ने क्या कहा वेतन मिली होली बाद। ऐसी परिस्थितियों से उबारने का प्रयास किसी ने किया तो वह माध्यमिक शिक्षक संघ और उसके पुरोधा श्री केदारनाथ पांडे जी ने किया। एक समय था कि महंगाई भत्ता भी शिक्षकों को समय पर नहीं मिल पाता था लगातार आंदोलन करना पड़ता था उसके बाद सरकार महंगाई भत्ते को सीधे शिक्षक को न देकर के उनके खाते में अन्य मदों से भुगतान करती थी लेकिन संघर्ष के परिणाम स्वरूप आज महंगाई भत्ता ससमय शिक्षकों को मिल जाता है लेकिन शिक्षक समाज को लगता है कि यह कोई उपलब्धि नहीं है जाहिर सी बात है हमारी चिंतन परंपरा ही ऐसी है जिसमें सामान्य चीजों को स्थान नहीं मिलता है जैसे सांस का चलना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसकी कीमत कोई नहीं लगाता हां जब सांस रुक जाती है तब लगता है सांस ही जीवन था इसी तरह माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रयास भी शिक्षक समाज के लिए स्वास प्रास्वास की तरह हैं। जब नियोजन शुरू हुआ तब माननीय श्री केदारनाथ पांडे जी ने विधानमंडल में प्रमुखता से इस मुद्दे को उछाला और सरकार से आग्रह किया कि अगर सरकार तत्काल नहीं दे रही है तो कम से कम वादा तो करें कि निकट भविष्य में नियोजित शिक्षकों को पुराने शिक्षकों की भांति सुविधाएं देगी लेकिन यह निर्दयी सरकार इतना आश्वासन देने को भी तैयार नहीं हुई और विधानसभा एवं विधान परिषद के मूर्धन्य माननीयों ने ताली की गड़गड़ाहट के बीच ध्वनि मत से नियोजन नियमावली को स्वीकृति प्रदान कर दिया जब नियोजन हुआ तो कोई सुविधा नहीं थी 3 वर्षों पर नाम मात्र की वेतन बढ़ोतरी की बात की गई थी न मातृत्व अवकाश था और ना ही अर्जित अवकाश और ना ही आकस्मिक अवकाश का संचय मान किए जाने का प्रावधान लेकिन संघर्ष लगातार चलता रहा और वर्तमान मुख्यमंत्री के इस गर्वोक्ति पर कि हमने ऐसा नियम बना दिया है जिसको कोई चुनौती नहीं दे सकता है इस संघ ने बीड़ा उठाया और इसी सरकार से एक बार नहीं बार-बार नियोजन नियमावली को संशोधित कराया आज यह संशोधित नियमावली धीरे-धीरे ही सही मूल नियमावली के करीब पहुंच चुकी है एक विकृत वेतनमान भी मिल चुका है अभी हालिया आंदोलन के परिणाम स्वरूप नया आकार लेने वाली नियोजन नियमावली में लगभग वह सारी चीजें मिलने वाली हैं जो नियमित शिक्षकों को मिलती रही हैं इपीएफ का मिलना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है अगर 14 परसेंट सरकार योगदान करती है और इतना ही शिक्षक का योगदान होता है तो यह एक अच्छी राशि होगी जो हम नियोजित शिक्षकों के बुढ़ापे का सहारा होगी यह सारी उपलब्धियां अनायास नहीं है और ना ही सोशल मीडिया पर लड़े जा रहे बड़बोले विचारों की परिणति हैं बल्कि इसके पीछे श्री केदारनाथ पांडे जी का शांति पूर्ण प्रयास है जो इस निष्ठुर सरकार को भी मना कर कुछ लाभ दिलाने में सफल दिख रहा है वर्तमान समय में केदारनाथ पांडे जी का कोई विकल्प नहीं है बाकी जितने प्रत्याशी हैं कोई प्रत्याशी सिवाय पांडे जी की आलोचना के और कोई सकारात्मक पहल नहीं कर पा रहा है अभी चिकित्सा संविदा कर्मियों की हड़ताल जारी है और सरकार का निष्ठुर व्यवहार भी देखने को मिल रहा है लेकिन कोई तथाकथित बुद्धिजीवी इनके पक्ष में बोलने को तैयार नहीं है आखिर क्यों? सिर्फ इसलिए की इनके पक्ष में बोलने से विधान परिषद में जाने का रास्ता नहीं दिखता रास्ता तो सिर्फ इस तरह दिखता है की पांडे जी की आलोचना करो एक आदर्श स्थिति से वर्तमान के यथार्थ की तुलना करो और जो अंतर है उसके लिए पांडे जी को जिम्मेदार ठहराओ यह कौन नहीं जानता है आदर्श आदर्श होता है और हर कोई चाहता है कि आदर्श प्राप्त हो जाए लेकिन अगर ऐसा संभव होता तो मरने के बाद स्वर्ग की कल्पना निरर्थक हो जाति। यह दुनिया ही स्वर्ग बन चुकी होती।। इसलिए हमारी समझ में पांडे जी का कोई विकल्प नहीं है एकमात्र व्यक्ति हैं जो माध्यमिक शिक्षा की संपूर्ण समझ रखते हैं और इनका लंबा अनुभव है जो माध्यमिक शिक्षकों को लाभ दिला सकता है बाकी लोग हवा हवाई बातें करके केवल और केवल बनी बनाई व्यवस्था को बर्बाद कर सकते हैं उनके पास कोई सकारात्मक सोच नहीं है और ना ही बदलाव के लिए कोई कार्य योजना है ना ही उर्जा है कुछ लोग जातिगत आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं कुछ लोग पार्टी लाइन पर चुनाव लड़ रहे हैं इसका परिणाम क्या होगा? यह लोग अगर सफल होते हैं तो संघ को भी समाप्त करेंगे और विद्यालयों को युद्ध का अखाड़ा बनवा देंगे ।जो लोग आज सरकार से प्रश्न नहीं पूछते वह कल क्या प्रश्न पूछेंगे! इसलिए शांत भाव से चिंतन की आवश्यकता है और इस चिंतन में सिर्फ एक ही विकल्प दिखता है वह है केदारनाथ पांडे जी। इसलिए हम सब चाहते हैं कि संघ को और केदारनाथ पांडे जी को अपनी पूरी सामर्थ्य के संग मजबूती प्रदान करें। जिस संघ का अध्यक्ष चुनाव हार जाएगा सरकार उस संघ को कितना महत्व देगी यह समझने के लिए बहुत ज्यादा विद्दता की आवश्यकता नहीं है सामान्य समझ ही यह बता रही है। यदि हम पांडे जी को हराएंगे तो प्रकारांतर से संघ को ही हरायेंगे और अपने अस्तित्व को मिटायेंगे।शिवेन्द्र,अनुमंडल सचिव,गोपालगंज

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