ट्रांस क्वीन इंडिया ब्यूटी पेजेंट की ब्रैंड अम्बेसडर नव्या सिंह बनी ट्रांस वूमेन के लिए मिसाल

इंज़माम वहीदी, मुम्बई: आपने कई लोगों की कामयाबी के क़िस्से सुनें होंगे लेकिन आज जो कहानी आपको हम बताने जा रहे हैं वह बिल्कुल ही अलग तरह की है। आज हम जिनके बारे में बात करने जा रहे हैं उन्होंने काफ़ी परेशनियों को झेलते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई है साथ ही साथ उन्होंने किन्नर समाज के लिए भी एक मिसाल क़ायम की है। आइए जानते हैं नव्या सिंह की मशक़्क़त भरी कहानी। किस तरह से उन्होंने समाज में एक अलग मुक़ाम हासिल किया ।

नव्या जी आप कहां से ताल्लुक रखती हैं ?
मैं कटिहार(बिहार) के काढ़ागोला के लक्ष्मीपुर से ताल्लुक रखती हूं। सरदार पंजाबी परिवार से मेरा नाता है । मेरे पिता जी का नाम सुरजीत सिंह है, मेरी माता जी का परम जीत कौर है। इंडस्ट्री में पिछले दस सालों से मैं बतौर मॉडल और एक्ट्रेस काम कर रही हुं।

आप अपने कैरियर को किस तरह से देखती हैं ?
मैंने अपनी ज़िंदगी में काफ़ी परेशनियों का सामना किया है। मेरी ज़िंदगी बहुत ही मशक़्क़त भरी रही है। मेरे लिए ये आसान नहीं था कि छोटे से गांव से मुम्बई जैसे शहर में आकर आपने सपने पूरे कर सकूं। सबसे पहले तो मुझे ख़ुद की पहचान के लिए ही संघर्ष करना पड़ा था क्योंकि ट्रांस वूमेन की Identity को समाज में जल्दी Acceptance नहीं मिलता है। जब पता चल जाता है कि आपका बच्चा और बच्चों से थोड़ा अलग है तो आपके परिवार को ही समाज से अलग कर दिया जाता है और हीन भावनाओं से देखा जाता है। मेरे साथ ऐसा तो नहीं हुआ था लेकिन जब मैं माता-पिता के साथ किसी कार्यक्रम में जाती थी तो लोग उनके सामने मेरा मज़ाक उड़ाते थे जिससे मुझे काफ़ी निराशा होती थी। बचपन में इन सब चीज़ों से काफ़ी गुज़र चुकी हुं।

आपके परिवार वालों ने आपको किस तरह से हौसला दिया ?
मेरे परिवार वालों ने मेरा काफ़ी साथ दिया और मेरी हौसला अफज़ाई कि। मैंने अपनी  ग्रैजुशन तो नहीं की क्योंकि चीज़ें वहां पर बद से बदतर हो गईं थीं। जहां बचपन कभी प्यार मिलता था वह प्यार बड़े होते होते मज़ाक में तब्दील हो गया था। मैं बहुत ख़ुश नसीब हूं कि मेरे माता-पिता ने मुझे कभी हार मान्ने नहीं दिया। उनका कहना था कि तुम हमारे लिए लड़का रहो या लड़की रहो हमें कोइ फ़र्क़ नहीं पड़ता है।.मेरे ही बच्चो हो अगर तुम्हे अपनी ज़िंदगी अलग तरह से गुज़ारनी है अपनी एक अलग पहचान बनानी है तो बनाओ हम लोग तुम्हारे हर फ़ैसले में तुम्हारे साथ हैं।

आपने मुम्बई का रुख कब किया ?
मुझे आज भी याद है मैंने 7 फरवरी 2011 में मुम्बई की ओर रुख किया और अपने परिजन के यहां रहने लगी। यहां से मैंने अपनी ज़िंदगी को एक अलग मोड़ दिया। मैंने अपने आपको नव्या सिंह नाम दिया क्योंकि मेरे सारे क़रीबी दोस्त मुझे नव्या ही बुलाते हैं। मैंने अपने आपको पूरी तरह से एक महिला में परिवर्तित किया। यहां मैंने LGBT समुदाय के ट्रांस वुमेन के लिए ब्युटी विद पर्पस पर काम करना शुरू किया। मैं इनकी बहुत ही इज़्ज़त करती हुं और उनके लिए मुझसे जो भी बन पड़ता है मैं खुशी-खुशी करती हुं।

आपने आज तक क्या-क्या उपलब्धियां हासिल की हैं ?
मैं इंडिया की पहली ट्रांस वुमेन थी जिसने लैकमे फ़ैशन वीक 2017 में एजियो ब्रैंड डिसाइनर कनिका वोरा के लिए रैम्प वॉल्क किया। मिस ट्रांस क्वीन इंडिया 2018 की ब्रैंड अम्बैसडर रह चुकी हुं। पहली ट्रांस वूमेन हूं जो इंडिया एबसोल्युट के कवर पेज पर फीच्रड हुइ थी। ‘सावधान इंडिया’ क्राइम शो में बतौर लीड एक्ट्रेस काम कर चुकी हूं। इन्टरनेशनल म्युज़िक वीडियो ‘शीवर’ मोनिका डोगरा के लिए भी काम किया है। गाज़िया, कॉस्मोपोलिटन, ब्यूटी आर्ट और ला मोड इंटरनोशनल मैग़जीन में फीचर्ड हो चुकी हुं। 2019 में बेस्ट सुपर मॉडल का अवार्ड भी मिल चुका है। इस तरह की कई और उपलब्धियां और ख़िताबों से नवाज़ी जा चुकी हुं।

इंडस्ट्री में किस तरह कैरियर बना सकते हैं, युवाओं के लिए कोई संदेश ?
मैं युवाओं से यही कहना चाहती हुं की आप में अगर लगन है तो आप कोई भी काम करें कामयाबी ज़रूर मिलेगी। इस इंडस्ट्री कई अच्छे तो कई बुरे लोग भी होते हैं। छोटे-छोटे गांव से युवा माया नगरी मुम्बई का रुख करते हैं लेकिन सही दिशा निर्देश पता नहीं होने की वजह से कॉस्टिंग काउच का भी शिकार हो जाते हैं । मेरे जीवन में भी वो दौर आया लेकिन मैं उस जाल में फंसी नहीं शायद ये भी एक कारण है कि मैं ज़्यादा कामयाब नहीं बन पाई हुं। मैं आप सब से यही कहना चाहुंगी की इंडस्ट्री में काम बहुत है आप अपने हुनर के बल पर काम लें किसी भी जाल में नहीं फंसे। डीजिटल ज़माना है नेट पर सब जानाकिरियां मौजूद हैं उनके सहारे ऑडिशन देने जाएं और अपने हुनर को निखारे एक दिन कामयाबी ज़रूर मिलेगी।

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