जब हौसला बना लिया ऊँची उड़ान का फिर देखना फिज़ूल है कद आसमान का- ऐक्ट्रेस सूचिस्मिता घोष

इंज़माम वहिदी, मुम्बई: आप अगर अपने सपने को साकार करने के लिए दिल लगाकर मेहनत करते हैं तो यक़ीन मानिए कामयाबी एक दिन आपके क़दम ज़रूर चूमती है। आज हम आपमो मिलवाने जा रहे हैं कोलकाता की सुचिस्मिता घोष से जिन्होंने अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बनाई है।

मेरा नाम सूचिस्मिता घोष है मैं कोलकाता की रहने वाली हूं। मैंने कोलकाता से अपना स्कूलिंग की। मेरे घर वाले मुझे 12th के बाद डॉक्टर बनाना चाहते थे। क्योंकि मेरा मार्क्स हमेशा 90% आता था मेरे घर वालों को मुझसे बहुत ज़्यादा उम्मीदें थी।

मैं बचपन से ही खुद को टेलिविज़न और फ़िल्म में देखना चाहती थी पर घर वालों को खुल कर बोल नहीं पाती थी। अपने अंदर ही रखती थी क्योंकि मेरे घर वालों का पढ़ाई को लेकर बहुत प्रेसर था। मैंने 12th के बाद 1 साल अपनी पढ़ाई छोड़ दी मुझे मेडिकल exam की तैयारी करनी थी। उसी वक़्त मुझे मिस इंडिया के ऑडिशन के बारे में पता चला तो मैं 2016 में 12th करके ऑडिशन देने चली गयी

Youtube से मैं ramp walk सीखती थी और भी बहुत सारी चीजें मैं youtube, google से ही सीखती थी। मुझे कोई बताने वाला या समझाने वाला नहीं था। मैं खुल कर किसी से बोल भी नहीं पाती थी। बातों को बस अपने अंदर ही रख कर कोशिश करती थी कि कुछ नया नया सीखूं। Miss India West Bengal Top 10 Finalist में सेलेक्ट हुई।

जिससे मुझे थोड़ी हिम्मत मिली और मैंने डिसाइड किया की अब मुझे मेडिकल में नहीं, अपना Career सिर्फ़ फ़िल्म इंडस्ट्री में ही बनाना है। ऐक्ट्रेस बन कर अपना सपना पूरा करना है।

मैंने पापा से बोला मुझे ऐक्ट्रेस बनना है, पापा ने हंसकर कहा की पागल हो गयी हो क्या ? फ़िल्म लाइन हमारे लिए नहीं है। वहां ऐसे काम नहीं मिलता। सिर्फ़ ऐक्टर/ ऐक्ट्रेस के बच्चों को ही काम मिलता है । वही इस लाइन में काम करते हैं। यह सब हम लोगों लिए नहीं है। अपनी मेडिकल की पढ़ाई पर ध्यान दो। पापा ने देहरादून में Computer Science Engineering में दाख़िला करा दिया।

मेरे कॉलेज में फ़ैशन शो होता है जो बहुत उत्तराखंड में काफ़ी पॉपुलर है। मैं जब 2nd year में थी तो उस फ़ैशन शो में पार्टिसिपेट की जिसमें Miss Fashionista Winner बनी। 3rd year में मैंने फिर से Miss Fashionista का ख़िताब अपने नाम किया। इससे मुझे और ज़्यादा पॉज़िटिव vibes आने लगे। इसके बाद मुझे मॉडलिंग के लिए ऑफ़र आने लगे। मैंने देहरादून के काफ़ी सारे ब्रांड्स के साथ काम किया ।

मेरा सपना मॉडलिंग नहीं था ये तो बस मुझे ऑफ़र आने लगे तो कर लेती थी इस वजह से मुझे मेरे शहर में काफ़ी पहचान मिली।मैं इनसे से ज़्यादा ख़ुश नहीं थी, क्योंकि मेरा सपना तो कुछ और ही था मुझे एक ऐक्ट्रेस बनाना था।

फिर ऐसा लगा की मुझे मेरे ऐक्टिंग पे मेहनत करनी चाहिये, मैं बचपन से ही ऐसी हूं मुझे हर चीज़ बिल्कुल Perfect चाहिये होती है । इसलिए मैंने देहरादून में थियेटर Join किया ताकि मैं अपने आपको एक अच्छी ऐक्ट्रेस के लिए तैयार कर सकूं। थियेटर करने के बाद घर पर मेरी Practice और नई-नई चीजें सीखने की कोशिश जारी थी। अब मुझे ऐसा लगता है कि मैं तैयार हूं।

बस जाते जाते लास्ट में यही कहना चाहती हूं कि दूसरे शहर से जो लड़कियां होती हैं उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री में Career बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। बहुत चीजों का सामना करना पड़ता है, लड़ना पड़ता है। आपके अंदर अगर हौसला है और Talented हो फिर सच्चे दिल से मेहनत करो। ख़ुद पर भरोसा रखो फिर तो आपको आपकी मंज़िल ज़रूर मिलेगी। इस सफ़र में आपको हर तरह के लोग मिलते हैं । मुझे तो अक्सर अच्छे लोग ही मिले हैं।

जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का फिर देखना फिज़ूल है कद आसमान का। धन्यवाद

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