किसानों से बड़ा योगी कौन-नुरूज जोहा

मुर्शीद खान (पटना):- 21 जून 2017 को योग दिवस बड़ी धूम धाम से मनाया गया। जिसमे सरकारी धन का बुरी तरह अपव्यय हुआ।योग दिवस से कोई दिक्कत नही है न होना चाहिये लेकिन इसके नाम पर सरकारी धन, समय तथा शक्ति का इस्तेमाल गलत है।क्या योगा से गरीबों की गरीबी कम हो गई या बेरोजगार युवा को रोजगार मिल गया। क्या योग देश के विकास के मायने को तय करता है।अगर नहीं तो फिर योग के नाम पर इतना ढिंढोरा क्यों? आज देश में 70 प्रतिशत लोग गरीब किसान तथा मध्यम वर्ग के है। क्या उनकी इस गरीबी बेरोजगारी और महंगाई से उबारने का कोई उपाय है इस सरकार के पास क्या इस योग से किसानों की फसल दोगुनी होने वाली है? असल में ये सरकार मुद्दों से भटकाने वाली सरकार है तीन साल से ये सरकार योग के नाम पर तमाशा कर रही है जिसका देश की स्थिति परिस्थिति से कोई लेना देना नही है।

उक्त बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया आईटी सेल के संयोजक नुरूज जोहा (अमजद) ने कही।उन्होंने मोदी जी से सवाल किया कि क्या तीन साल मे उनके मंत्रिमंडल में सभी लोग योग करने से फिट हो गए हैं यदि नही तो सबसे पहले उन्हें योग कराने की जरुरत है। भारत की जनता अपने सेहत का ख्याल रखना जानती है।

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