मासूम सदरपुरी की दिल को छू जाने वाली नज़्म, सरकार के खोखले दावे !

गेहूँ उधर सरकार के गोदाम में सड़ता रहा ।

और इधर हरिया का बेटा भूँख से मरता रहा ।।

हो गया बिलकुल अकेला इसका अब कोई नहीं ।
है यही वो सख्श जो कल झूठ से लड़ता रहा ।।

मुज़रिमों के बन चुके थाने यहाँ अय्याशगाह ।
इसकी चौखट से तो केवल बेगुनाह डरता रहा ।।

उसकी बेवा खा र ही है दर बदर की ठोकरें ।
देश की सेवा जो आखिर साँस तक करता रहा ।।

इंसाफ की उम्मीद में ही मर गयी ‘नन्ही कली’ ।
फ़ैसला मुंसिफ़ का फिर भी रोज ही टलता रहा ।

One thought on “मासूम सदरपुरी की दिल को छू जाने वाली नज़्म, सरकार के खोखले दावे !

  • November 10, 2018 at 6:46 pm
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    Aapki paheli kiran se logon ko andhere me sahi raasta dikhayi deta hai umeed hai ki aap hamesha desh wasiyon ko sahi raasta dikhainge.
    Ek shair nazar hai. Siyasat dano ke naam.
    Jala jo dil to use roshani samajh baithe.
    Mere labon ki hansi ko khushi samajh baithe.
    Mujhe to rakhni thi ulfat ki aabroo lekin.
    Woh khamshi ko meri bujdili samajh baithe. Naseem salonvi. Salon raibareli up 9838928008

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