इस वीर सपूत ने कारगिल युद्ध में देश भक्ति का फ़र्ज़ उस दौरान भी निभाया जबकि घर पर हुई थी पिता की मृत्यु

इंज़माम वहिदी, नई दिल्ली :हमारे वतन की मिट्टी ने अनेकों ऐसे शूरवीर दिए हैं, जिन्होंने परिवार और खुद की जिंदगी दांव पर लगाकर देश धर्म निभाया है। एक ऐसी ही सख्शियत है युवाओं में हमेशा जोश भरने वाले कमांडो रामेश्वर श्योराण, जिन्होंने मात्र 21 साल की उम्र में कारगिल की जंग लडकर दुश्मनों के दांत खट्टे किए। इसी दौरान जब बीच लड़ाई के उनको घर में पिताजी की मृत्यु का समाचार वायरलैस सैट् पर सुना तो इस टुकड़ी के कमांडर को ये कहकर घर जाने से मना कर दिया कि घर पर जो होना था हो चुका, मै एक बेटे का फ़र्ज़ नहीं निभा पाया इसके लिए गुनहगार हूं पर मां भारती के फ़र्ज़ को निभाकर ही घर जाऊंगा। इसके बाद जो टास्क मिला था, उसको पूरा करके ही कमांडो श्योराण घर पर 10 दिन की छुट्टी आए और इसके बाद तुरन्त वापिस जाकर कारगिल में मोर्चा संभाला। यही नहीं इसके बाद 26नवम्बर 2008 को मुंबई हमले के दौरान होटल ताज में देश के दुश्मनों से फिर लोहा मनवाया। और 2014 में सेना सेवानिरवत के बाद लगातार युवाओं को देश धर्म के लिए प्रेरणा देते रहे हैं। रात दिन हरियाणा ही नहीं अपितु राजस्थान, पंजाब उतर प्रदेश के यूथ को देशभक्ति और इंसानियत के लिए प्रेरित करते रहना ही जीवन का आधार बना लिया। इस दौरान किसानों, महिलाओं की आवाज के लिए संघर्ष करते रहे हैं। और अब आने वाले समय में सिनेमा क्षेत्र में देशभक्ति और यूथ को राष्ट्र प्रेम के लिए काम करने के प्रयास कर रहे हैं। सलाम ऐसे सच्चे सैनिक के जज्बे को जो मिसाल कायम कर रहे हैं देशभक्ति और जुनून की।

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