मुझे आसमान तक जाना है, रास्ता ख़ुद बनाना है, पढ़िये क्या है पूरा मामला

इंज़माम वहीदी, कोलकाता: सीढ़ीयां उन्हें मुबारक जिन्हें छत तक जाना है, मेरी मंज़िल तो आसमां है मुझे रास्ता ख़ुद बनाना है। कोलकाता के छोटे से परिवार से ताल्लुक रखने वाली अलिविया दास की कहानी कुछ ऐसी ही है।

अलिविया अपने मामा के घर रहती हैं क्योंकि काफ़ी दिन पहले उनके माता-पिता अलग हो गए थे। अलिविया ने बचपन से कई स्कूलों में पढ़ाई की पांचवी कक्षा से लेकर माध्यमिक की पढ़ाई तक उहोंने भव्य देसावर धर्मतल्ला कन्या विद्यालय से की उसके बाद उन्होंने 12वीं की पढ़ाई रविंद्र सिटी स्कूल से की। अलीविया की पढ़ाई अब भी बदस्तूर जारी है वह बी.कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं।

अलिविया ने किसी से प्रेरित होकर इस फील्ड में क़दम नहीं रखा है, उन्हें बचपन से नृत्य का शौक था। इस वजह से उन्होंने इस फील्ड में अपना कैरियर चुना। जब उन्होंने शुरूआत की थी तो उन्हें काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा किसी का भी सपोर्ट नहीं मिला। वह घर वालों को बिना बताए शूट करने जाती थी। पहले परिवार का सपोर्ट नहीं मिलता था लेकिन अब परिवार का पूरा सपोर्ट मिल रहा है, उनका परिवार ही उनकी ताक़त है।

अलिविया बताती हैं कि इस फ़ील्ड काफ़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जब आप मॉडल बनने का सपना संजो कर मार्केट में क़दम रखते हैं तो आए दिन नई-नई चुनौतियों से होकर गुज़रना पड़ता है। कोई कहता है पोर्टफोलियो अच्छा बनवाओ। आपका पोर्टफोलियो सही नहीं है। पोर्टफोलियो बनाने और प्रोजेक्ट देने के नाम पर 40 से 50 हज़ार रुपये की मांग करते हैं। वहीं अगर कोई पोर्टफोलियो की बात नहीं करता है तो यह पूछता है की आपको काम दूं तो क्यों दूं मेरे पास और भी नामचीन मॉडल हैं प्रोजेक्ट के लिए फिर आपको क्यों लूं आप में क्या ख़ास है। आपको शुरूआती दौर में इस तरह की काफ़ी चुनौतियौं से आए दिन रूबरू होना पड़ता है।

अलिविया का ड्रीम गोल सुपर मॉडल बनने का है। वह कहती हैं कि अगर वह अपने सपने को साकार कर पाईं तो वह इंडस्ट्री में कदम रखने वाली नई पीढीयों को उनके मुक़ाम तक पहुंचाने में मदद करेंगी। जिस तरह से शुरूआती दौर में उन्होंने काफ़ी परेशानियों का सामना किया वैसे किसी और फ़्रेशर को चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़े उसके लिए वह मुफ़्त में सेवाएं देंगी।

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