छोटी दिवाली के विभिन्न नाम और उनका महत्व, आप भी जानिए

रश्मि किरण। नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का  पूजा या काली चौदस काली चतुर्दशी या रूप चौदस आदि नामों से हम कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पूजन करते हैं यह दिन दिपावली के ठीक एक दिन पहले आता है इसलिए छोटी दिवाली कहलाता है ।
नरकासुर नामक राक्षस को कृष्ण ,सत्यभामा और काली ने अश्विन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी  में मारा था इसीलिए आज का दिन नरक चतुर्दशी या काली चौदस या नरका निर्वाण चतुर्दशी आदि नाम से जान आ गया आज के दिन हर तरह की कालीमा  हर तरह की बुराई दोष हर तरह के नकारात्मक ऊर्जा को अपने जीवन से हटाने का प्रयास करते हुए स्वच्छ पवित्र शुद्ध रोशनी सा अपनी आत्मा में स्थापित करने की कोशिश करना चाहिए
ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी का जन्म आज के दिन ही हुआ था इसीलिए इसे हनुमान जयंती के रूप में भी मनाते हैं
आज के ही दिन भगवान श्री रामचंद्र जी 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या आए थे उस दिन अयोध्या वासियों ने खुशी में दिए जलाकर और उत्सव मनाकर भगवान श्री रामचंद्र जी माता जानकी वह लक्ष्मण का स्वागत किया था
बीथीं सकल सुगंध सिंचाई। गजमनि रचि बहु चौक पुराईं ।
नाना भांति सुमंगल साजे ‌। हरषि नगर निसान बहु बाजे।
अयोध्या वासियों के रूप खुशी से खिल उठे थे इसलिए इसे रूप चौदस भी कहते हैं ।
एक प्रचलित कथा है उसके अनुसार प्राचीन समय में हिरण्यगर्भ नामक राज्य में एक योगी रहते थे एक बार योगी राज ने प्रभु को पाने की इच्छा से समाधि धारण करने का प्रयास किया अपनी इस तपस्या के दौरान उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा वह बहुत ही विभस्त  दशा में पहुंच गए और दुखी रहने लगे एक बार नारद जी उस योगी के पास गए योगीराज ने उनसे कहा कि हे मुनिवर मैं प्रभु की भक्ति में इतना लीन हो गया कि मैं इस देह के आचार का पालन नहीं कर पाया और मेरी यह दशा हो गई नारद जी ने उन्हें कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा आराधना करने को कहा जिससे कि उनका शरीर पुनः पहले जैसा स्वस्थ और रूपवान हो जाए योगी ने नारद के कहे अनुसार व्रत किया और अपने सुंदर और स्वस्थ शरीर को प्राप्त किया इसलिए यह दिन रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना गया

यह ऋतु के बदलने का समय है बदलते ऋतु के साथ अपने तन मन को वह अपने घर वह घर के आस-पास सभी जगह हर तरह से साफ सुथरा स्वच्छ कर लेना बहुत जरूरी होता है जिससे रोग शोक दूर रहे अगर हर जगह अच्छाई रही तो लक्ष्मी जी का प्रवेश वहां अवश्य होगा ही
अगर हमारा तन मन स्वस्थ है और हमारे आसपास का माहौल साफ सुथरा है तो अवश्य हम अकाल मृत्यु से अपने आप को बचा सकते हैं इसीलिए आज के दिन रात के समय घर के बड़े बुजुर्ग में से कोई एक दीया जलाता है और उसे घर के बाहर ऐसे स्थान पर रख देता है जहां किसी भी घर वाले की नजर ना पड़े ऐसा माना जाता है इससे अकाल मृत्यु से यमलोक दर्शना भाव कामोहमभ्यम्स्नानं करिष्ये ।
एक प्रचलित कथा है की रति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके समक्ष यमदूत आ खड़े हुए यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नरक जाना होगा आप मुझ पर कृपा करो और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है यह सुनकर यमदूत ने कहा कि एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था उसी पाप का फल है इसके बाद राजा ने यमदूत से 1 वर्ष का समय मांगा तब यमदूत ने राजा को 1 वर्ष का समय दे दिया राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषि के पास गए और ऋषि को सारी बातें बताई और मुक्ति का उपाय पूछा ऋषि ने बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उनके प्रति हुए अपने अपराध की क्षमा मांगे राजा ने वैसा ही किया इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुआ और वह विष्णु लोक में स्थान प्राप्त किया उस दिन के बाद से भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन यह व्रत प्रचलित हो गया

कथाओं का वैज्ञानिक अर्थ समझ कर उसके पालन से हम अवश्य जीवन में लाभ पात्र सकते हैं ।यह तभी संभव है जब हम पढ़े लिखे समझदार हों पढ़ें लिखे मूर्ख नहीं ।

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