मुझे आसमान तक जाना है, रास्ता ख़ुद बनाना है, पढ़िये क्या है पूरा मामला

इंज़माम वहीदी, कोलकाता: सीढ़ीयां उन्हें मुबारक जिन्हें छत तक जाना है, मेरी मंज़िल तो आसमां है मुझे रास्ता ख़ुद बनाना

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