बुरे से बुरे हालातों के बीच इंसानियत ज़िंदा है

बेगूसराय:कोरोना वायरस (COVID-19) ने पूरी दुनिया को बंधक बना लिया है। इटली सहित कई देशों में लॉकडाउन हो चुका है। सभी देशों की सरकारें अपने नागरिकों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए भरसक प्रयास कर रही हैं। ऐसे भय के माहौल में लोगों के पास खाने पीने और जरूरी सामानों की कमी ना हो, इसके लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। कई लोग और निजी संगठन भी इस महामारी के समय में लोगों की मदद कर रहे हैं। सभी अपने स्तर पर इस महामारी से निपटने में लगे हुए हैं।सरकार के लॉकडाउन के आदेश के बीच जरूरतमंदों की सहायता को कई जागरूक लोगों ने मदद के हाथ आगे बढ़ाए हैं। नूरपुर (बेगूसराय) में सीवान से ताल्लुक रखने वाले Arshad Siddiqui और “SAVE FOUNDATION”(By Human For Human) ने मानवता की मिसाल पेश की है। इन्हें देख कर यह साफ़ हो गया है कि बुरे से बुरे हालातों के बीच इंसानियत ज़िंदा है।  बेगूसराय के नूरपूर गांव से इनका दूर दूर तक कोई ताल्लुक नहीं है।बस एक रिश्ता है तो वह है इंसानियत का रिश्ता जिसके तहत उन्होंने नूरपुर गांव में भूखमरी के शिकार हुए ग़रीब परिवार के लिए क़रीब 10 दिन के राशन की व्यवस्था की है, और आगे के दिनों के लिए भी राशन और ज़रूरी सामानों के देने का आश्वासन भी दिया है। वहीं Arshad Siddiqui और उनकी संस्था “SAVE FOUNDATION”(By Human For Human) ने एक कैंसर के मरीज़ के लिए 1 महीने की दवा की भी व्यवस्था की है। अरशद सिद्दीक़ी ने जनता से अपील करते हुए कहा कि देश बहुत ही बड़ी मुसीबत के दौर से गुज़र रहा है इस कड़ी में आपसे जो भी बन पड़े वो अपने समाज के लिए करने की कोशिश करें । अपने आस पड़ोस का ध्यान रखें। कोई ऐसा परिवार हो जो इस महामारी में भूखे मरने की कगार पर है उसकी जितनी हद तक हो सके आर्थिक या राशन दे कर मदद करने की कोशिश करें।

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