श्रवण कुमार ने भी अपने माता पिता को साथ लेकर की थी ये शुरुआत

आकाश मलिक: सावन शुरू होते ही शिवभक्त गंगा जल भरने के लिए कंधों पर कांवर लेकर निकल पड़ते हैं और महादेव का अभिषेक करने के लिए आस्था की कतार लगने लगती है… मान्यता है कि भगवान राम पहले कावड़िया थे कहते हैं श्रीराम ने झारखंड के सुल्तानगंज से कांवड़ में गंगाजल लाकर बाबा धाम के शिवलिंग का जलाभिषेक किया था.. यही नहीं श्रवण कुमार ने भी अपने माता पिता को साथ लेकर कांवड़ की शुरुआत की थी एक मान्यता यह भी है कि रावण था।

तब से लेकर आज तक सैकड़ों भक्त कावर लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी अपनी मनोकामना को पूर्ण करते हैं ऐसी एक कावड़ हमें मेरठ में देखने को मिली जहां पर हमे कई अनोखी कावड़ देखने को मिली एक युवक दिल्ली निवासी मोनू नोटो को कावड़ लेकर आया उसका कहना है कि वह पहली बार में ₹5000 के नोटों की कावड़ लेकर आया था ।ऐसे ही बढ़ाते बढ़ाते हैं अब उसकी कावड़ ₹13000 तक आ गई है ।और हर साल वह कावड़ में नोट बढ़ाता रहेगा मोनू का कहना है कि भोले बाबा उसकी मनोकामना पूरी कर देते हैं और वह हर साल इसी तरीके से नोटों की कावड़ लाता रहेगा वही दूसरा मामला हमें देखने को मिला की एक माता-पिता महज 10 माह के बच्चे को लेकर हरिद्वार जा रहे थे गंगा जल भरने के लिए ताकि वह भगवान का जलाभिषेक कर सकें.. यह कहानी हमें बताती है कि भक्ति की कोई उम्र नहीं होती केवल मन में विश्वास और आस्था का भाव खाना चाहिए।

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