हैंडलूम की कला को सहेजने का काम कर रहे युवा बढ़ा रहे बिहार की शान, पढ़िए पूरी ख़बर

आतिफ़ खान,पटना। हैंडलूम से बने कपड़े धीरे-धीरे बज़ारों से गायब हो रहे हैं.अब मशीनों से झटपट बने आउटफिट्स ही दुकानों पर सजे नज़र आते हैं. त्योहार जैसे खास मौकों के लिए लोगों की पहली पसंद यही चमक-धमक वाले कपड़े बन रहे हैं. लेकिन आज भी ऐसे कुछ ब्रैंड्स और कारीगर मौजूद हैं जो मशीनों से ज्यादा हाथों से किए गए असली काम को तवज्जो देते हैं. जिस तरह इनका काम खास है उसी तरह इनके खरीददार भी वही लोग हैं जो भारतीय कला को पसंद करते हैं. क्योंकि हाथों से किए गए इस काम की कीमत और सादापन, सिर्फ वही खरीद रहा है जिसे असली कला की समझ हो.
हाथों से बनाई जा  रही हैंडलूम की कला को सहेजने का काम कर रही है आर्टिशन गैलरी (Artisans Gallery).साल 2015 से यहां के आर्टिस्ट मधुबनी कला को मॉर्डन ट्विस्ट के साथ कपड़ों पर उतार रहे हैं. सिर्फ कपड़ों पर नहीं भारत की इस सबसे खूबसूरत कला को गहनों और होम डेकोर के समानों पर भी बनाया जा रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां हैंडलूम को बचाने के साथ-साथ महिलाओं को रोजगार देकर भी उन्हें सशक्त किया जा रहा है. यहां इस आर्ट को अपने हाथों से महिला आर्टिस्ट ही कढ़ती हैं.

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