अध्यात्म व योग के समागम अर्हं योग शिविर में उमडा़ अपार जनसमूह

नई दिल्ली, 23 जून । ध्यान व अध्यात्म के साथ योग की यात्रा को ही अर्हं ध्यान योग कहा गया है जो कि अपने आप में अद्भुत व अद्वितिय है जहां योग से ध्यान की प्राप्ति होती है वहींं अर्हं ध्यान योग ध्यान के माध्यम से आत्मा की शक्ति को  उजागर करके शून्य से अनंत तक ले जाता है यह मानना है आचार्य श्री विध्यासागर जी के परम प्रभावक शिष्य अर्हं योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर जी मुनि राज का जिनके सानिध्य में आज लाल किला मैदान में आयोजित विशाल अर्हं योग शिविर में 35 हजार से अधिक व्यक्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी, सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा एवं विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता,सहयोग के मनोज जैन सहित अनेक नेता व प्रशाशनिक अधिकारी आदि विशेष रुप से उपस्थित थे।

इस अवसर पर मुनि श्री ने बताया कि अपनी आजादी अर्थात तनाव, क्रोध,अवसाद, असफलता, भय, घृणा,ईर्ष्या, अहंकार, लालच एवं लोभ आदि से मुक्ति जो कि हमें अपना भाग्य स्वयं बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी जिससे हम एक स्वस्थ खुशहाल व शांत जीवन व्यतित कर पाएंगे।
श्री प्रणम्य सागर जी ने बताया कि   अर्हं ध्यान योग मानव जीवन कल्याण एवं विश्व शांति के लिये भारत को धरोहर में मिली एक अनमोल प्राचीन पद्धति है जिसका मकसद प्रत्येक भारतीय को अपनी व्यक्तिगत आजादी के प्रति सजग बनाते हुए चैतन्य शक्ति की पहचान कराना।उन्होंने बताया कि योग का अर्थ है स्वयं से स्वयं का मिलन जबकि अर्हं योग ध्यान से आत्मा को जागृत करने का माध्यम है।
सुबह 5 बजे शुरू हुए अर्हम योग ध्यान शिविर में सवा घंटे तक मुनि प्रणम्य सागरजी ने सभी लोगों को योग ध्यान का महत्व बताते हुए इसे दैनिक जीवन शैली से जोडने का आह्वान किया, ताकि जीवन स्वस्थ सुखी शांतिमय तथा सकारात्मक ऊर्जा वाला बना रहे।
मुनिश्री के अर्हम ओम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अर्हम शुद्धि का तथा ओम शांति का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में हमारे ऋषि मुनियों ने शक्ति शुद्धि को अपने ध्यान का विषय बनाया। शक्ति के लिए यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का अभ्यास है। व्यक्ति के जीवन को शारीरिक स्वास्थ्य मन की शुद्धि मिलती है, तो सहज रूप से शांति मिलने लगती है। णमोकार मंत्र में आए शब्दों के उच्चारण की तरंगों से शांति मिलती है तथा नकारात्मक सोच से बाहर निकलकर सकारात्मक सोच विकसित होने लगती है।
अंतराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित इस अर्हं योग महोत्सव की जानकारी देते हुए कार्यक्रम के संयोजक पंकज जैन ने बताया कि लाल किला मैदान में आयोजित इस महामहोत्सव में पूरी दिल्ली से लगभग 35  हजार लोगों ने भाग लिया जिसमें महिला  पुरुष व बुजुर्गों के साथ साथ बच्चों ने भी भाग लिया । उन्होंने बताया कि दिल्ली के लाल किला मैदान में इस तरह का पहला आयोजन था जिसमें अध्यात्म के साथ योग सिखाया गया। लाल किला मैदान में जिधर नज़र डालो योग करते महिला पुरुष व बच्चे ही दिखाई दे रहे थे।
आयोजन समिति के सदस्य शरद कासलीवाल ने बताया कि आयुष मंत्रालय, सी आई एस एफ के सदस्यों सहित अनेक अधिकारियों व राजनेताओं तथा समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया ।उन्होंने बताया कि अभी तक देश भर के लाखों लोग इस अद्भूत पद्धति का लाभ उठा चुके हैं इसके अलावा दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में भी अर्हं ध्यान योग का आयोजन किया जाएगा।
सह संयोजक एन .सी.जैन ने बताया कि यह अर्हं योग महामहोत्सव आशा से भी कहीं ज्यादा सफल रहा हमें आशा नहीं थी कि इतना जबरदस्त अपार जनहमूह योग करने के लिये उमड़ पडे़गा। जल्दी ही अगला अर्हं योग शिविर आयोजित किया जाएगा।

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